संजय निषाद बोले- मछुआरा समाज पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं

Report By: Kirna Prakash Singh

यूपी के मंत्री संजय निषाद ने मौसमी नेताओं से मछुआरा समाज को सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा नहीं करेगा।

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संजय निषाद का मछुआरा समाज को लेकर बड़ा बयान, मौसमी नेताओं पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के बीच कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने मछुआरा समुदाय को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर समाज के लोगों से कथित तौर पर वोटों की राजनीति करने वाले नेताओं से सावधान रहने की अपील की।

डॉ. संजय निषाद ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में खड़ा हुआ है। ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की जरूरत है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कुछ नेताओं पर निशाना साधा और उन पर समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया।

1. मौसमी नेताओं से सावधान रहने की अपील

डॉ. संजय निषाद ने अपने बयान में कहा कि कुछ ऐसे नेता हैं जो अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, अलग-अलग जगहों पर घूमकर दूसरों की राजनीति में भूमिका निभानी है या फिर मछुआरा समाज के वोटों की राजनीति करनी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम रहे और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

2. ‘पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं’

संजय निषाद ने कहा कि जो व्यक्ति खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर उत्तर प्रदेश के निषाद समाज को राजनीति सिखाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश के मछुआरा समाज को राजनीति सिखाने से पहले यह समझना जरूरी है कि राजनीति और संघर्ष समाज के इतिहास का हिस्सा रहे हैं।

3. मुगलों और अंग्रेजों से संघर्ष का किया जिक्र

डॉ. संजय निषाद ने मछुआरा समाज के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि समुदाय ने मुगलों और अंग्रेजों के दौर में संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि संविधान के माध्यम से समाज को अधिकार और आरक्षण मिला, लेकिन आपसी बिखराव के कारण समाज को अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने दावा किया कि आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप जैसे अलग-अलग नामों के आधार पर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जाती है।

4. वोटों का सौदा करने वालों को पहचानने की बात

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समाज के लोगों से ऐसे लोगों को पहचानने की अपील की जो उनके मुताबिक दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटने और वोटों का सौदा करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज आर्थिक रूप से गरीब हो सकता है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा करने वाला नहीं है। उनके मुताबिक समाज को अपने राजनीतिक हितों को समझते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।

5. चुनावी माहौल में बयान के सियासी मायने

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच संजय निषाद का यह बयान निषाद और मछुआरा समाज के राजनीतिक महत्व को लेकर चर्चा बढ़ा सकता है। निषाद समुदाय उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सामाजिक समूह माना जाता है और अलग-अलग राजनीतिक दल इसे अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं।

संजय निषाद लंबे समय से निषाद समाज के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। इस बार उन्होंने समाज के वोटों को लेकर कथित तौर पर सक्रिय नेताओं से सावधान रहने की बात कही है।

उन्होंने अपने बयान के अंत में ‘जय निषादराज’ लिखा। हालांकि जिन नेताओं पर उन्होंने निशाना साधा, उनके नाम उन्होंने सार्वजनिक रूप से नहीं लिए। ऐसे में उनके बयान में किए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

फिलहाल विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को लेकर गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में मछुआरा और निषाद समाज को लेकर दिए गए नेताओं के बयान आने वाले दिनों में चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

दिनांक: 14 सितंबर 2026
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