
Report By: Kiran Prakash Singh
कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार FIR पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ी तो बिना अनुमति नए केस दर्ज करने पर रोक लगाएगा।
Digital Live News | 8 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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अभिषेक बनर्जी पर बार-बार FIR से हाई कोर्ट नाराज
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही एफआईआर को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। तीन एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि इसी तरह लगातार नए मामले दर्ज होते रहे तो वह ऐसा व्यापक आदेश जारी कर सकती है, जिससे कोर्ट की अनुमति के बिना अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नया मामला दर्ज करने पर रोक लग सके।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने इन तीनों मामलों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई से मिली सुरक्षा भी जारी रखी।
बार-बार FIR पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जिन तीन एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है, वे 4 जुलाई, 11 जुलाई और 23 जुलाई को दर्ज की गई थीं। इन मामलों का संबंध मुख्य रूप से पिछले साल शुरू की गई सामुदायिक स्वास्थ्य पहल ‘सेबाश्रय’ से जुड़े आरोपों से बताया गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लगातार दर्ज हो रही शिकायतों पर सवाल उठाए और संकेत दिया कि यदि एक ही व्यक्ति के खिलाफ इसी तरह मामले दर्ज होते रहे तो अदालत को व्यापक आदेश पर विचार करना पड़ सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों की जांच करने में उसे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जांच के नाम पर हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं।
‘अब बहुत हो चुका’, जज ने राज्य को चेताया
सुनवाई के दौरान जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि वह मई 2026 से इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब वह सुवेंदु अधिकारी से जुड़े एक मामले में समकक्ष पीठ के आदेश को ध्यान में रखते हुए व्यापक रोक लगाने वाले आदेश पर विचार कर रहे हैं।
जज ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब बहुत हो चुका है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामले की सुनवाई और अधिक महत्वपूर्ण हो गई।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में अपराध या अनियमितता के आरोप हैं तो उनकी जांच की जा सकती है और जरूरत के अनुसार आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है।
तीन FIR में ‘सेबाश्रय’ का मामला
मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, तीन एफआईआर में से दो शिकायतें 4 जुलाई और 11 जुलाई को दर्ज की गई थीं। इनमें से एक शिकायत अभिजीत दास उर्फ बॉबी की ओर से की गई थी।
कोर्ट ने दोनों शिकायतों के विषय में समानता की ओर भी ध्यान दिलाया। इसके बाद अदालत ने यह सवाल उठाया कि क्या लगातार शिकायतें किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने का माध्यम बन रही हैं।
हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति के चुनाव हारने से उसका शिकायत दर्ज कराने का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। वहीं राज्य सरकार ने अभिजीत दास को ‘व्हिसलब्लोअर’ बताया।
सेबाश्रय को लेकर राज्य सरकार के आरोप
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत के सामने ‘सेबाश्रय’ को लेकर कई आरोप रखे। राज्य सरकार का दावा था कि कुछ केंद्रों पर एक्सपायर्ड दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े मामले सामने आए।
सरकार की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि ‘सेबाश्रय’ का संचालन क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट के नियमों के अनुरूप नहीं किया गया। इसके अलावा लिंग निर्धारण से जुड़ी जांच किए जाने का आरोप भी अदालत के सामने रखा गया।
ये सभी आरोप मामले में पक्षों की ओर से रखे गए दावे हैं। इनकी सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होना है।
कोर्ट ने पूछा- आरोपों का अभिषेक से सीधा संबंध क्या?
राज्य सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि इन आरोपों का अभिषेक बनर्जी से सीधा संबंध किस तरह बनता है।
जस्टिस भट्टाचार्य ने संकेत दिया कि यदि किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी लापरवाही का मामला है तो उसकी जांच की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। लेकिन अदालत ने सवाल किया कि ऐसी कथित अनियमितताओं को सीधे अभिषेक बनर्जी से जोड़ने का आधार क्या है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच पर रोक लगाने की बात नहीं कही जा रही, लेकिन किसी व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ करना हर मामले में जरूरी नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान अभिजीत दास की ओर से पेश वकील ने अभिषेक बनर्जी को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए जांच जारी रखने की मांग की। वहीं जज ने वकील के अदालत में बोलने के तरीके पर भी आपत्ति जताई और उन्हें अपने तर्क पूरक हलफनामे के जरिए रखने को कहा।
फिलहाल कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। अदालत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि लगातार नए मामले दर्ज होने का सिलसिला जारी रहा तो वह इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार कर सकती है।
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