
Report By: Kiran Prakash Singh
रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर को वर्षों की तैयारी और स्वदेशी तकनीक का परिणाम बताया। उन्होंने सटीक हमलों और रणनीति की भूमिका समझाई।
Digital Live News | 8 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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ऑपरेशन सिंदूर पर रिटायर्ड एयर मार्शल का बड़ा खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने इसे केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि वर्षों की तैयारी, तकनीकी विकास, रणनीतिक सोच और स्वदेशी क्षमताओं के सामूहिक परिणाम के तौर पर बताया। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मिश्रा ने भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना के जवानों की भूमिका को रेखांकित किया।
मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने आधुनिक युद्ध में बदलती तकनीक और भविष्य की चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे।
ऑपरेशन सिंदूर को बताया वर्षों की तैयारी का परिणाम
जीतेंद्र मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अचानक तैयार किया गया अभियान नहीं था। इसके पीछे लंबे समय से चल रही तकनीकी तैयारी और रणनीतिक योजना की भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और सैन्यकर्मियों ने मिलकर ऐसी क्षमताएं विकसित की हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरत के समय किया जा सकता है। उनके मुताबिक, किसी भी आधुनिक सैन्य अभियान की सफलता केवल हथियारों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पीछे मौजूद तकनीकी व्यवस्था और मानव संसाधन भी महत्वपूर्ण होते हैं।
मिश्रा ने इस पूरे अभियान को भारत की बढ़ती स्वदेशी क्षमता से जोड़कर देखा।
आधुनिक युद्ध में तकनीक का बढ़ता महत्व
रिटायर्ड एयर मार्शल ने कहा कि आज के दौर में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल पारंपरिक हथियार ही निर्णायक नहीं होते, बल्कि डेटा, संचार, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सटीक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने आम जिंदगी से जुड़ा उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई व्यक्ति पेट्रोल पंप पर कार्ड से भुगतान करता है तो अलग-अलग तकनीकी प्रणालियां मिलकर कुछ ही समय में लेनदेन पूरा कर देती हैं। इसी तरह भविष्य के सैन्य अभियानों में भी कई तकनीकी प्रणालियां एक-दूसरे से जुड़कर काम करेंगी।
मिश्रा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने तकनीकी बदलाव की गति को और तेज कर दिया है। जो देश इस बदलाव के साथ खुद को लगातार अपडेट नहीं करेंगे, उनके लिए आगे प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।
सटीक हमले की क्षमता पर मिश्रा की बात
ऑपरेशन सिंदूर की तकनीकी क्षमता का जिक्र करते हुए मिश्रा ने कहा कि भारत ने लंबी दूरी के लक्ष्यों को बेहद सटीकता से निशाना बनाने की क्षमता प्रदर्शित की। उनके मुताबिक, इस तरह की क्षमता किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि इसके पीछे वर्षों की रिसर्च, परीक्षण और तकनीकी विशेषज्ञता होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक को प्रभावी बनाए रखने के लिए लगातार सीखना और नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
मिश्रा के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और सटीक कार्रवाई में इस्तेमाल की गई क्षमताएं लंबे समय से चल रही तैयारियों का हिस्सा थीं।
बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में बताया अंतर
मिश्रा ने 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों अभियानों के समय परिस्थितियां और रणनीतिक फैसले अलग थे।
उन्होंने बताया कि बालाकोट के समय भी भारतीय वायुसेना के पास आवश्यक क्षमताएं मौजूद थीं। उनके अनुसार, दोनों अभियानों के बीच अंतर मुख्य रूप से उस समय लिए गए रणनीतिक फैसलों और परिस्थितियों से जुड़ा था।
मिश्रा ने उरी हमले के बाद भारत की सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर को इसी व्यापक रणनीतिक क्रम में देखा जा सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर को अंतिम चरण नहीं माना
जीतेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर को इस प्रक्रिया का अंतिम चरण मानने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और सैन्य क्षमता को लगातार विकसित करने की जरूरत होती है।
उनके मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों के लिए भारत को स्वदेशी तकनीक, आधुनिक प्रणालियों और बेहतर रणनीतिक सोच पर लगातार काम करना होगा। उन्होंने तकनीकी बदलाव की तेज रफ्तार को देखते हुए विशेषज्ञता और नवाचार को महत्वपूर्ण बताया।
मिश्रा ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में केवल सैन्य उपकरणों की संख्या मायने नहीं रखती। उन्हें संचालित करने वाली तकनीकी व्यवस्था, प्रशिक्षण, योजना और सही समय पर लिए गए फैसले भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
इस तरह रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की टिप्पणियों में ऑपरेशन सिंदूर को भारत की लंबी तकनीकी और रणनीतिक तैयारी के परिणाम के रूप में पेश किया गया। साथ ही उन्होंने भविष्य के युद्धक्षेत्र में AI और स्वदेशी तकनीक की बढ़ती भूमिका को लेकर भी संकेत दिए।
Digital Live News | 8 सितंबर 2026 | digitallivenews.com