
Report By: Kiran Prakash Singh
राम मंदिर ट्रस्ट में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की CEO पद पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए। बीजेपी ने फैसले को सकारात्मक और पारदर्शी बताया।
नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए प्रतिनिधित्व पर सवाल
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किए जाने के बाद इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा के पूर्व सांसद उदित राज ने नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए ट्रस्ट के प्रबंधन में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है।
उदित राज ने कहा कि जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर शानदार रहा है, लेकिन ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज के लिए अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि वाले लोगों पर भी विचार किया जा सकता था। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के प्रबंधन में OBC और दलित समुदायों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
वहीं, बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने ट्रस्ट के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि नियुक्ति में दक्षता, क्षमता और पारदर्शिता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया होगा।
जितेंद्र मिश्रा बने ट्रस्ट के पहले CEO
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। यह पद ट्रस्ट के प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके सैन्य करियर को लेकर किसी तरह का सवाल नहीं उठाते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों पर भी विचार किया जा सकता था।
ट्रस्ट की ओर से नियुक्ति के पीछे जिन आधारों को ध्यान में रखा गया है, उन्हें लेकर बीजेपी ने इसे व्यावसायिकता बढ़ाने वाला कदम बताया है।
उदित राज ने प्रतिनिधित्व को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता उदित राज ने नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह चयन प्रक्रिया पहले से तय होने जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से OBC और दलित प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उदित राज का कहना है कि जब राम को सभी का बताया जाता है और हिंदू धर्म को भी सभी के लिए कहा जाता है, तो संस्थागत स्तर पर समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी दिखाई देनी चाहिए।
हालांकि, ये उदित राज की राजनीतिक प्रतिक्रिया और उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं। ट्रस्ट की नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में अंतिम तथ्य संबंधित संस्था के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगे।
सैन्य अनुभव पर भी कांग्रेस ने की टिप्पणी
उदित राज ने जितेंद्र मिश्रा के सैन्य अनुभव की सराहना करते हुए कहा कि वह एयर मार्शल रहे हैं और उनका करियर शानदार रहा है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल उठाया कि ट्रस्ट का कामकाज एक सिविल सोसाइटी और धार्मिक-सामाजिक संस्था के प्रशासन से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि IRS, डिफेंस अकाउंट्स, वित्त या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े अनुभवी अधिकारियों पर भी विचार किया जा सकता था। कांग्रेस नेता ने इसे अपनी पसंद का विषय बताते हुए ट्रस्ट के निर्णय पर सवाल उठाए।
इस बयान के बाद नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
बीजेपी ने नियुक्ति को बताया सकारात्मक कदम
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने अपना पहला CEO नियुक्त किया है और उन्हें उम्मीद है कि यह निर्णय दक्षता, क्षमता और पारदर्शिता को ध्यान में रखकर लिया गया होगा।
त्रिवेदी के अनुसार, CEO की नियुक्ति से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज में अधिक पेशेवर व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट ने अन्य सदस्यों की नियुक्तियां भी की हैं और इससे संस्था की कार्यक्षमता तथा प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है।
राम मंदिर को लेकर सियासी बयानबाजी जारी
राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े मुद्दे लंबे समय से देश की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में हुए बदलाव पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आना भी चर्चा का विषय बन गया है।
एक तरफ कांग्रेस नेता प्रतिनिधित्व और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी इस नियुक्ति को मंदिर ट्रस्ट के कामकाज में पेशेवर व्यवस्था और क्षमता बढ़ाने वाला कदम बता रही है।
फिलहाल, जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज में क्या बदलाव आते हैं, इस पर नजर रहेगी। आने वाले समय में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि यह नई व्यवस्था मंदिर से जुड़े प्रबंधन और प्रशासन को किस तरह प्रभावित करती है।
3 सितंबर 2026 | digitallivenews.com