
Report By: Kiran Prakash Singh
कोटा की 16 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद AIIMS पर सवाल उठे। AIIMS ने बताया कि बीमारी की जटिलता के कारण 2017 में सर्जरी संभव नहीं मानी गई थी।
नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
13 साल तक इलाज की उम्मीद, फिर तन्वी की मौत; AIIMS ने बताई पूरी कहानी
राजस्थान के कोटा की रहने वाली 16 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद दिल्ली के AIIMS पर कई सवाल उठ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि तन्वी जन्मजात हृदय रोग के इलाज और सर्जरी के लिए लंबे समय तक अस्पताल के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसकी सर्जरी नहीं हो सकी। मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को तन्वी की मौत के बाद मामला चर्चा में आया है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर जांच शुरू करने की बात कही है। वहीं, AIIMS की ओर से मामले को लेकर जारी जानकारी में कहा गया है कि तन्वी की बीमारी जटिल थी और अलग-अलग स्तर पर विशेषज्ञों से उसका मूल्यांकन किया गया था। अस्पताल के अनुसार, 2017 में उपलब्ध चिकित्सकीय आकलन के आधार पर सर्जरी को संभव नहीं माना गया था।
2012 में पहली बार AIIMS पहुंची थी तन्वी
AIIMS की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, तन्वी की पहली जांच 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी OPD में हुई थी। जांच के दौरान उसमें वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं का पता चला।
VSD ऐसी स्थिति है जिसमें दिल के दो निचले कक्षों के बीच मौजूद दीवार में असामान्य छेद होता है। वहीं पल्मोनरी एट्रेसिया में दिल से फेफड़ों तक रक्त के प्रवाह से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है।
AIIMS के मुताबिक, इसके बाद तन्वी की स्थिति और हृदय की संरचना को समझने के लिए कई जांच कराई गईं।
2013 में सर्जरी की संभावना का हुआ मूल्यांकन
AIIMS के अनुसार, साल 2013 में तन्वी के हृदय का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इसके लिए CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी जांचों का सहारा लिया गया।
इन जांचों का उद्देश्य हृदय की बनावट, रक्त प्रवाह और बीमारी की जटिलता को समझना था, ताकि आगे के उपचार को लेकर फैसला लिया जा सके।
AIIMS की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इन चिकित्सकीय आकलनों के बाद विशेषज्ञों ने तन्वी की स्थिति को गंभीर और जटिल माना।
2017 में सर्जरी को लेकर क्या फैसला हुआ?
AIIMS का कहना है कि बीमारी की जटिलता और हृदय की संरचना को देखते हुए 2017 में सर्जरी संभव नहीं मानी गई। परिवार को नियमित जांच और दवाओं के जरिए उपचार जारी रखने की सलाह दी गई।
इसके बाद भी तन्वी AIIMS के संपर्क में रही और नियमित चिकित्सकीय निगरानी में रही। AIIMS की जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2026 में उसकी स्थिति को देखते हुए उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया।
परिवार ने इस दौरान सर्जरी की संभावनाओं को लेकर अन्य विशेषज्ञों से भी राय ली। AIIMS के अनुसार, CTVS विभाग और एक अन्य वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से राय लेने पर भी दवा के जरिए इलाज जारी रखने की सलाह दी गई थी।
अगस्त में हालत बिगड़ी, 1 सितंबर को मौत
AIIMS के मुताबिक, तन्वी को 24 अगस्त 2026 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने दोबारा विस्तृत जांच की।
इस दौरान हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन की संभावनाओं का भी मूल्यांकन किया गया। हालांकि, इलाज के दौरान उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और 1 सितंबर 2026 को तन्वी की मौत हो गई।
परिवार की ओर से इस मामले में जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग की गई है। तन्वी के पिता ने भी न्याय की गुहार लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
AIIMS ने बनाई जांच कमेटी
मामला सामने आने के बाद AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की है। अस्पताल का कहना है कि मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता और सबूतों के आधार पर चिकित्सकीय निर्णय लेना उसकी प्राथमिकता है।
AIIMS ने यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम और जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि तन्वी की बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पिछले वर्षों में उसके इलाज और सर्जरी को लेकर लिए गए फैसले उचित थे या नहीं। इसका जवाब अब जांच कमेटी की रिपोर्ट और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
तन्वी के परिवार के लिए यह मामला सिर्फ एक चिकित्सकीय निर्णय का नहीं, बल्कि लंबे समय तक इलाज की उम्मीद के बाद बेटी को खोने का है। अब सभी की नजर AIIMS की जांच और उसके निष्कर्ष पर है।
3 सितंबर 2026 | digitallivenews.com