
Report By: Kiran Prakash Singh
30 जून 2026: ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव में महायुति ने 21 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। जानिए पूरी रणनीति और परिणाम।
Published Date: 30 जून 2026
Website: digitallivenews.com
ठाणे जिला सहकारी बैंक चुनाव में महायुति का मास्टरस्ट्रोक, 21 में से 13 सीटों पर कब्जा
ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (TDCC Bank) के चुनाव में महायुति ने अपनी रणनीतिक योजना के दम पर बड़ी जीत दर्ज की है। कुल 21 सीटों में से 13 सीटों पर जीत हासिल कर महायुति समर्थित उम्मीदवारों ने बैंक के संचालन पर मजबूत पकड़ बना ली है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने केंद्र और राज्य में सहयोगी होने के बावजूद अलग-अलग पैनलों से उम्मीदवार उतारकर विपक्ष को चौंका दिया। राजनीतिक जानकार इस रणनीति को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा नेता रवींद्र चव्हाण का बड़ा मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं।
अलग-अलग पैनलों से चुनाव लड़ने की रणनीति रही सफल
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि महायुति के दोनों प्रमुख दल भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने एक ही पैनल से चुनाव लड़ने के बजाय अलग-अलग पैनलों में अपने उम्मीदवार उतारे। ‘सहकार पैनल’ और ‘परिवर्तन पैनल’ के माध्यम से चुनाव मैदान में उतरने की इस रणनीति ने विपक्ष की तैयारियों को प्रभावित कर दिया। दोनों दलों का कहना था कि बड़ी संख्या में इच्छुक उम्मीदवार होने के कारण यह फैसला लिया गया। परिणामों ने साबित कर दिया कि यह रणनीति महायुति के लिए बेहद कारगर रही।
हितेंद्र ठाकूर के प्रभाव वाले क्षेत्र में बदला राजनीतिक समीकरण
कई वर्षों से ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर बहुजन विकास आघाड़ी और उसके प्रमुख नेता हितेंद्र ठाकूर का प्रभाव माना जाता रहा है। इस बार महायुति ने सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से पूरी ताकत झोंक दी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा नेता रवींद्र चव्हाण ने स्थानीय स्तर पर व्यापक चुनावी रणनीति तैयार की, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला। इससे ठाणे के सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
भाजपा के 8 और शिंदे गुट के 5 उम्मीदवार बने विजेता
घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा के 8 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) के 5 उम्मीदवार विजयी रहे। इस तरह महायुति समर्थित कुल 13 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की। 21 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत के लिए 11 सीटों की आवश्यकता थी, लेकिन महायुति ने उससे अधिक सीटें जीतकर बैंक के प्रशासन पर मजबूत नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह जीत संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।
अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी हलचल
चुनाव परिणाम आने के बाद अब बैंक के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदों के चयन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इन पदों पर अंतिम फैसला महायुति के वरिष्ठ नेतृत्व की सहमति से होगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बैंक की कमान किस नेता के हाथों में जाएगी। स्थानीय स्तर पर कई नामों की चर्चा शुरू हो चुकी है।
महायुति की जीत का राजनीतिक महत्व
ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चुनाव केवल सहकारी क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसका प्रभाव स्थानीय और क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ता है। सहकारी संस्थाओं में मजबूत पकड़ भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दलों के लिए अहम मानी जाती है। महायुति की यह जीत ठाणे जिले में उसके बढ़ते जनाधार और संगठनात्मक मजबूती का संकेत मानी जा रही है। वहीं विपक्ष के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। आने वाले समय में इस जीत का असर क्षेत्र की राजनीतिक रणनीतियों और सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी देखने को मिल सकता है।
Source: digitallivenews.com