TET विरोध तेज: शिक्षक संघ ने सरकार को अल्टीमेटम, पूर्व नियुक्तों को छूट की मांग

Report By: Kiran Prakash Singh

शिक्षक संघों ने TET अनिवार्यता के खिलाफ धरना और ज्ञापन दिए, पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट, अध्यादेश की मांग और आंदोलन तेज होने की चेतावनी दी।

📢 TET विवाद भड़का: “आजाद भारत में गुलामी नहीं चलेगी”—महिला शिक्षक संघ का अल्टीमेटम, आंदोलन तेज

फिरोजाबाद (digitallivenews) |  से बड़ी खबर है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर अब टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ ने संयुक्त मोर्चा बनाकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि “आजाद भारत में गुलामी प्रथा नहीं चलेगी”—उनका स्पष्ट संदेश है कि वे TET की अनिवार्यता को स्वीकार नहीं करेंगे।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET लागू करना नियमों का पूर्वव्यापी दुरुपयोग है और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। पहले नियुक्त शिक्षकों को इसका लाभ मिला था और अब अचानक नई अनिवार्यता थोपे जाने से अनुभव और सेवा को अनदेखा कर दिया गया है। इस बदलाव को संघ “सेवा शर्तों में अवैध हस्तक्षेप” मानते हैं, जिससे शिक्षक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

📍 विरोध और धरना – कई जिलों में भारी प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में टीईटी विरोध प्रदर्शन जोर पकड़ चुका है। शिक्षक संगठनों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और BSA कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। मुरादाबाद, संतकबीरनगर, मऊ, इटावा समेत अन्य जिलों में शिक्षक जनसमूहों के साथ प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंप रहे हैं।

उन्हें बताया जा रहा है कि 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग है और यदि सरकार तुरंत अध्यादेश लाकर इस समस्या का समाधान नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर बढ़ाया जाएगा।

📊 लाखों शिक्षकों का भविष्य अधर में

शिक्षक संघों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 2 लाख और देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षक इस फैसले से प्रभावित हैं। उन पर पूर्व से सेवा के बावजूद टीईटी पास करने की नई शर्त लगने से भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

शिक्षक संगठन और फेडरेशन का तर्क है कि अनुभव और दशकों से सेवा देने के बावजूद अचानक परीक्षा बाध्यता उनके सम्मान और जीवन रक्षा के मूल भाव के खिलाफ है।

📜 सुप्रीम कोर्ट का TET आदेश

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के बाद और तीव्र हुआ, जिसमें सभी शिक्षकों पर टीईटी उत्तीर्ण किए बिना सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया गया था। कई शिक्षक संघों ने इस फैसले के खिलाफ केंद्र से हस्तक्षेप और समीक्षा याचिका दाखिल करने की मांग भी की है।

📢 अगले कदम – आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्दी समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और व्यापक स्तर पर बढ़ाया जाएगा। इसके लिए शिक्षक संगठनों ने रणनीति तैयार की है और जिला स्तर पर बड़े धरना–प्रदर्शन की तैयारियाँ जोरों पर हैं।


🟦 प्रमुख बिंदु

  • शिक्षक संघ TET अनिवार्यता वापस लेने की मांग पर सख्त रुख।

  • RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की अपील।

  • कई जिलों में काली पट्टी पहनकर विरोध प्रदर्शन।

  • आंदोलन को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने की चेतावनी।

  • केंद्र सरकार तक ज्ञापन के माध्यम से संदेश पहुंचाया गया।

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