दिसंबर 2025 में बढ़ी बेरोजगारी दर, शहरी इलाकों में ज्यादा असर

Report By: Kiran Prakash Singh

दिसंबर 2025 में बढ़ी बेरोजगारी दर, शहरी इलाकों में ज्यादा असर

NSO के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की बेरोजगारी दर 4.8% हो गई। शहरी क्षेत्रों में बढ़ोतरी दिखी, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी स्थिर रही।

नई दिल्ली (Digitallivenews)। देश में रोजगार को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.8 फीसदी हो गई है, जो नवंबर 2025 में 4.7 फीसदी थी। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली है, लेकिन यह संकेत देती है कि रोजगार बाजार में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

एनएसओ के मुताबिक, यह बीते आठ महीनों में दूसरा निचला स्तर है, यानी स्थिति पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन सुधार की रफ्तार धीमी नजर आ रही है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ने से नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ गई है।

शहरी क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ी बेरोजगारी

आंकड़ों के अनुसार, शहरी बेरोजगारी दर दिसंबर में बढ़कर 6.7 फीसदी हो गई, जो पिछले महीने से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भर्तियों में सुस्ती, स्टार्टअप सेक्टर में छंटनी और कुछ उद्योगों में लागत कटौती इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 3.9 फीसदी पर स्थिर बनी रही। कृषि और ग्रामीण आधारित कार्यों में स्थिरता के कारण ग्रामीण रोजगार बाजार अपेक्षाकृत संतुलित नजर आया।

पुरुषों और महिलाओं में बेरोजगारी का हाल

दिसंबर 2025 में महिलाओं की बेरोजगारी दर 4.7 फीसदी रही, जबकि पुरुषों की बेरोजगारी 4.9 फीसदी दर्ज की गई। दोनों ही आंकड़ों में पिछली रिपोर्ट की तुलना में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं की बेरोजगारी दर भले ही पुरुषों से थोड़ी कम दिख रही हो, लेकिन यह इस तथ्य को नहीं छुपाती कि अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार बाजार से बाहर हैं।

श्रमबल हिस्सेदारी में सुधार के संकेत

हालांकि बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी चिंता का विषय है, लेकिन एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। श्रमबल हिस्सेदारी दर बढ़कर 56.1 फीसदी हो गई है। इसका मतलब है कि ज्यादा लोग नौकरी की तलाश में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमबल हिस्सेदारी 59 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50.2 फीसदी दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में काम करने वालों की भागीदारी शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।

महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी

इस रिपोर्ट का एक अहम और सकारात्मक पहलू यह है कि 15 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाओं की श्रमबल हिस्सेदारी बढ़कर 35.5 फीसदी तक पहुंच गई है। यह संकेत देता है कि धीरे-धीरे अधिक महिलाएं शिक्षा, स्वरोजगार और नौकरी के अवसरों की ओर बढ़ रही हैं।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है। अगर यह रुझान आगे भी जारी रहता है, तो इसका लंबे समय में रोजगार और आय दोनों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर में बेरोजगारी दर में आई यह हल्की बढ़ोतरी मौसमी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से भी जुड़ी हो सकती है। वैश्विक मंदी की आशंका, ब्याज दरों में अनिश्चितता और निर्यात आधारित उद्योगों पर दबाव का असर घरेलू रोजगार बाजार पर भी पड़ा है।

उनका कहना है कि सरकार को शहरी रोजगार सृजन, कौशल विकास और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देना होगा।

आगे की राह

कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत का रोजगार बाजार मिश्रित संकेत दे रहा है। जहां एक ओर बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी चिंता बढ़ाती है, वहीं श्रमबल हिस्सेदारी और महिलाओं की भागीदारी में सुधार उम्मीद जगाता है।

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी, सरकारी योजनाओं और निजी क्षेत्र की भर्तियों से रोजगार के नए अवसर कैसे पैदा होते हैं। रोजगार बाजार की स्थिरता और समावेशी विकास भारत की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।

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