
Report By: Kiran Prakash Singh
संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब: “दहशत और दमन में डूबा है पड़ोसी देश”
नई दिल्ली, (DigitalLiveNews)। पाकिस्तान की दोहरी नीति, आतंकी पनाहगाह की भूमिका और अपने ही नागरिकों पर अत्याचार को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से एक बार फिर कड़ा जवाब दिया है।
भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि,
“भारतीय क्षेत्र को लेकर लालच करने के बजाए उन्हें अवैध कब्जा खाली करना चाहिए और अपनी अर्थव्यवस्था, राजनीति और मानवाधिकार रिकॉर्ड को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।“
उन्होंने यह भी कहा कि शायद पाकिस्तान तब सुधरे,
“जब उसे आतंकवाद बढ़ाने, यूएन द्वारा घोषित आतंकियों को शरण देने और अपने ही नागरिकों पर हमले करने से फुर्सत मिले।“
खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान की सेना का हवाई हमला: 30 नागरिकों की मौत
भारत के जवाब से पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक भयावह घटना सामने आई।
21 सितंबर की रात, पाकिस्तान की वायुसेना ने तिराह घाटी के मत्रे दारा गांव में कथित रूप से हवाई हमला किया, जिसमें:
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कम से कम 30 नागरिक मारे गए,
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सैकड़ों घायल हुए,
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महिलाएं और बच्चे भी मृतकों में शामिल हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार:
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हमले में चीन निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमानों से कम से कम 8 LS-6 बम गिराए गए।
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गांव पूरी तरह तबाह हो गया, और सड़कों पर जले हुए शव पड़े मिले।
पाकिस्तान सरकार की चुप्पी और विरोधाभासी बयान
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सरकारी बयान: स्थानीय प्रशासन ने हमले से इनकार करते हुए कहा कि ये हमला नहीं, बल्कि विस्फोटक सामग्री में दुर्घटनावश विस्फोट था।
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मरने वालों की संख्या: सरकार ने 14 आतंकियों सहित 24 लोगों की मौत का दावा किया, जबकि स्थानीय लोग इसे जानबूझकर किया गया हवाई हमला बता रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की सेना ने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में नागरिकों पर दमन और बर्बरता दिखाई हो।
भारत ने क्यों उठाई आवाज?
भारत ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि:
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वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है,
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अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों को शरण देता है,
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और अपने ही नागरिकों पर सैन्य हमले करता है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियों का सम्मान नहीं करता, उसे किसी भी मंच पर नैतिक उपदेश देने का कोई हक नहीं है।
📌 निष्कर्ष:
पाकिस्तान की अंदरूनी अस्थिरता, सैन्य अत्याचार और आतंकवाद को संरक्षण देने की नीति न केवल उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि उसके नागरिकों की जान और जिंदगी भी दांव पर लगी है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिक्रिया बताती है कि अब भारत मौन नहीं, बल्कि सटीक और तीखे शब्दों में जवाब देने की नीति पर काम कर रहा है।
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