
Report By: Kiran Prakash Singh
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मांगी विधायक पेंशन, हर माह मिलेंगे ₹42,000
नई दिल्ली | digitallivenews:
देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह राजनीतिक बयान या संवैधानिक पद नहीं, बल्कि विधायक पेंशन है। राजस्थान विधानसभा सचिवालय के अनुसार, धनखड़ ने हाल ही में पूर्व विधायक के नाते पेंशन के लिए आधिकारिक आवेदन दिया है। उनके इस कदम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
धनखड़ ने साल 1993 में अजमेर जिले की किशनगढ़ सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था और राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने थे। इस आधार पर उन्हें हर माह ₹42,000 की पेंशन मिलने की पात्रता है। राजस्थान में यह व्यवस्था है कि अगर कोई व्यक्ति विधायक और सांसद दोनों रह चुका हो, तो वह दोनों पदों की अलग-अलग पेंशन ले सकता है। यही कारण है कि कई पूर्व जनप्रतिनिधि इस “दोहरी पेंशन” का लाभ उठा रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुष्टि की है कि धनखड़ का आवेदन सचिवालय को प्राप्त हो चुका है और आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर पेंशन की यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ ही सप्ताह पहले उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था।
इस्तीफे ने उठाए थे कई सवाल
धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अपने इस्तीफे की जानकारी दी थी। उन्होंने इसका कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताया था। हालांकि, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया, जिससे सियासी हलकों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गईं।
इस मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कटाक्ष करते हुए कहा, “अब तक तो ‘लापता लेडीज़’ सुना था, लेकिन ये पहली बार है जब ‘लापता वाइस प्रेसिडेंट’ की कहानी सुनने को मिली है।” सिब्बल ने दावा किया कि जब उन्होंने धनखड़ के निजी सचिव से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि वे आराम कर रहे हैं। इसके बाद न तो कोई आधिकारिक बयान आया और न ही उनकी लोकेशन का स्पष्ट संकेत मिला।
दोहरी पेंशन पर फिर उठे सवाल
धनखड़ के इस कदम ने दोहरी पेंशन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर पेंशन प्रणाली को सार्वजनिक धन का विवेकपूर्ण उपयोग मानते हुए कई विशेषज्ञ दोहराव से बचने की वकालत करते हैं। लेकिन राजस्थान जैसे राज्यों में अभी भी यह व्यवस्था लागू है कि विधायक और सांसद दोनों पदों पर कार्य कर चुके व्यक्ति दोनों की पेंशन ले सकते हैं।
हालांकि, यह पूरी तरह कानूनी और नियमों के तहत है, लेकिन नैतिकता और सामाजिक दृष्टिकोण से इसे लेकर बहस होना लाज़मी है, खासकर तब जब कोई व्यक्ति देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रह चुका हो।
निष्कर्ष:
पूर्व उपराष्ट्रपति द्वारा विधायक पेंशन के लिए आवेदन करना एक कानूनी अधिकार जरूर है, लेकिन इससे जुड़े सांकेतिक संदेश और राजनीतिक सवाल भी अब सामने आ रहे हैं। पेंशन की यह खबर सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक संवेदनशील राजनीतिक विमर्श को भी जन्म दे रही है – कि क्या उच्च संवैधानिक पदों पर रहे लोगों को भी दोहरी पेंशन का लाभ लेना चाहिए?
समय के साथ यह बहस और तेज हो सकती है।