
Report By: Kiran Prakash Singh
केंद्र सरकार में 8.24 लाख पद खाली हैं। 10 साल में नियमित कर्मचारियों की संख्या घटी, जबकि PSUs में ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 49.1% हो गई।
Digital Live News | 25 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
केंद्र सरकार में 8.24 लाख पद खाली, भर्ती और ठेका व्यवस्था पर सवाल
केंद्र सरकार में सरकारी नौकरियों और खाली पदों को लेकर सामने आए आंकड़ों ने भर्ती प्रक्रिया और रोजगार व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार में करीब 8.24 लाख पद खाली हैं। खास बात यह है कि 2015 से 2024 के बीच स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ी, लेकिन भरे हुए पदों में कमी दर्ज की गई।
इसी अवधि में सरकारी कंपनियों यानी PSUs में नियमित कर्मचारियों की संख्या में बड़ी गिरावट आई, जबकि ठेका कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ी। इससे सरकारी रोजगार के स्वरूप में बड़े बदलाव का संकेत मिलता है।
10 साल में बढ़े पद, लेकिन भरे पद घटे
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक 10 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार में करीब 2.74 लाख नए पद बढ़े। इसके बावजूद भरे हुए पदों की संख्या लगभग 1.29 लाख कम हो गई।
इसका सीधा अर्थ है कि सरकार में स्वीकृत पदों और वास्तविक नियुक्तियों के बीच अंतर बढ़ा है। बड़ी संख्या में पद लंबे समय से खाली रहने के कारण सरकारी विभागों के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं।
खाली पदों की संख्या को लेकर अलग-अलग विभागों की स्थिति भी अलग है। कुछ विभागों में रिक्तियों का प्रतिशत काफी अधिक है, जबकि कुछ विभागों में पहले की तुलना में खाली पद बढ़े हैं।
रेलवे और डाक विभाग में भी बड़ी रिक्तियां
आंकड़ों के मुताबिक रेलवे में 2024 तक करीब 2.40 लाख पद खाली बताए गए हैं, जो कुल पदों का लगभग 16.2 प्रतिशत है।
डाक विभाग में भी रिक्तियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2015 में जहां 7,561 पद खाली बताए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 61,546 हो गई।
वाणिज्य विभाग में रिक्ति दर सबसे ज्यादा बताई गई है। यहां 55.4 प्रतिशत पद खाली होने का दावा किया गया है। स्वास्थ्य विभाग में भी 2015 के मुकाबले 2024 में करीब 6 प्रतिशत पद रिक्त बताए गए हैं।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकारी विभागों में कर्मचारियों की जरूरत और उपलब्ध मानव संसाधन के बीच अंतर बना हुआ है।
PSUs में नियमित कर्मचारी घटे, ठेका कर्मी बढ़े
सरकारी कंपनियों यानी PSUs के आंकड़े भी रोजगार व्यवस्था में बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं। 2015 में 298 PSUs में कुल 15,87,149 कर्मचारी थे। इनमें 12,91,174 नियमित कर्मचारी और 2,95,975 ठेका कर्मचारी थे।
2025 में PSUs की संख्या बढ़कर 475 हो गई, लेकिन कुल कर्मचारियों की संख्या घटकर 15,42,339 रह गई।
सबसे बड़ा बदलाव नियमित और ठेका कर्मचारियों के अनुपात में आया। 2025 में नियमित कर्मचारियों की संख्या घटकर 7,83,728 रह गई, जबकि ठेका कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 7,58,611 हो गई।
यानी ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 18.6 प्रतिशत से बढ़कर करीब 49.1 प्रतिशत हो गई।
आउटसोर्सिंग से लेकर भर्ती प्रक्रिया तक सवाल
सरकारी विभागों में काम आउटसोर्स करने के लिए GeM यानी Government e-Marketplace का इस्तेमाल भी बढ़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले साल इस प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 10 लाख कर्मचारियों के बराबर काम आउटसोर्स किया गया।
सरकारी भर्ती में देरी भी रिक्तियों की एक बड़ी वजह मानी जाती है। UPSC, SSC, रेलवे और बैंकिंग जैसी विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति में लंबा समय लग सकता है।
इसके अलावा कई विभागों में स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ने के बावजूद नियुक्तियां उसी गति से नहीं हुईं। इससे रिक्त पदों का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया।
सरकारी नौकरी का बदलता स्वरूप
इन आंकड़ों के बीच सरकारी नौकरी के बदलते स्वरूप पर भी बहस तेज हो गई है। एक ओर लाखों सरकारी पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी संस्थानों में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है।
सरकार के लिए नियमित कर्मचारियों पर वेतन, पेंशन और अन्य सेवा लाभों का खर्च भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। वहीं आउटसोर्सिंग के जरिए कई सेवाओं को निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
राजनीतिक स्तर पर भी खाली पदों को लेकर सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस ने 8.24 लाख खाली पदों का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर बेरोजगारी बढ़ने का आरोप लगाया है।
हालांकि, खाली पदों के आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि हर पद पर तत्काल भर्ती संभव है। पदों की स्वीकृति, विभागीय जरूरत, भर्ती नियम और बजट जैसे कई पहलू नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। फिर भी लाखों रिक्त पद और बढ़ती ठेका व्यवस्था सरकारी रोजगार के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर खड़ी करते हैं।