
Report By: Kiran Prakash Singh
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी पूरी रोक, तीन प्रावधानों पर लगाई आंशिक और पूर्ण रोक
नई दिल्ली (digitallivenews)।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को पूरी तरह रद्द करने से इनकार कर दिया है, लेकिन कानून के तीन अहम प्रावधानों पर रोक लगाकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने स्पष्ट किया कि पूरा कानून लागू रहेगा, लेकिन कुछ प्रावधानों पर रोक आवश्यक है।
⚖️ किस प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
🛑 1. इस्लाम में 5 साल की प्रैक्टिस की शर्त – पूर्ण रोक
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अब वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए 5 साल तक इस्लाम का पालन करने की शर्त लागू नहीं होगी।
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कोर्ट ने इसे असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण माना।
⚠️ 2. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य – संख्या सीमित
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वक्फ बोर्ड में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य ही हो सकते हैं।
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इसमें पदेन और नामित दोनों प्रकार के सदस्य शामिल हैं।
🚫 3. जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्ति घोषित करने का अधिकार – आंशिक रोक
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कोर्ट ने उस प्रावधान पर भी रोक लगाई, जिसमें कलेक्टर यह तय कर सकता था कि
कोई संपत्ति वक्फ है या सरकारी। -
कोर्ट ने कहा कि यह प्रशासनिक अधिकार का अतिक्रमण है और संपत्ति विवाद में निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
🧑⚖️ क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
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पूरा कानून रद्द नहीं किया जा सकता।
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न्यायपालिका का हस्तक्षेप केवल दुर्लभतम परिस्थितियों में होना चाहिए।
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कानून की संवैधानिकता की पूर्वधारणा हमेशा संसद के पक्ष में होती है।
सीजेआई गवई:
“हम समग्र रूप से कानून पर रोक नहीं लगा रहे हैं, बल्कि विशेष प्रावधानों को देखते हुए संवेदनशील रूप से सीमित हस्तक्षेप कर रहे हैं।”
🔊 प्रतिक्रियाएं:
📌 इमरान प्रतापगढ़ी (कांग्रेस नेता):
“यह अंतरिम निर्णय राहत देने वाला है। वक्फ संपत्तियों पर अब कोई खतरा नहीं है।”
📌 अश्विनी उपाध्याय और बरुन ठाकुर (याचिकाकर्ता):
“पूरा कानून लागू है। केवल तीन प्रावधानों पर रोक है, जिनमें भी दो आंशिक और एक पूर्ण है।”
🧠 पृष्ठभूमि: वक्फ और उसका महत्व
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वक्फ का अर्थ होता है किसी संपत्ति को धार्मिक या परोपकारी कार्यों के लिए स्थायी रूप से समर्पित करना।
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भारत में वक्फ की संपत्तियां सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होती हैं।
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वक्फ कानून की शुरुआत 1923 में हुई थी, जिसके बाद कई बार इसमें संशोधन किए गए।
🔚 निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय वक्फ अधिनियम को पूरी तरह खारिज नहीं करता, लेकिन संवैधानिक संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ प्रावधानों को रोके जाने की अनुमति देता है। यह फैसला विधायिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन का उदाहरण है, जहां कानून को पूरी तरह रद्द करने के बजाय संवेदनशील बिंदुओं पर हस्तक्षेप किया गया।