
Report By: Kiran Prakash Singh
जल्द आएगा जॉर्जिया मेलोनी की आत्मकथा का भारतीय संस्करण, प्रस्तावना पीएम मोदी ने लिखी
नई दिल्ली (DigitalLiveNews)।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आत्मकथा “आई एम जॉर्जिया: माई रूट्स, माई प्रिंसिपल्स” का भारतीय संस्करण जल्द ही रूपा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित किया जाएगा। इस संस्करण की खास बात यह है कि इसकी प्रस्तावना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं लिखी है। उन्होंने इस आत्मकथा को न केवल प्रेरणादायक बताया, बल्कि इसे अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” से भी प्रेरित माना है।
“देशभक्ति और नेतृत्व की मिसाल हैं मेलोनी” – पीएम मोदी
प्रस्तावना में पीएम मोदी ने लिखा, “प्रधानमंत्री मेलोनी का जीवन और नेतृत्व हमें इन शाश्वत सत्यों की याद दिलाता है… भारत में उन्हें एक उत्कृष्ट समकालीन राजनीतिक नेता और देशभक्त की ताज़ा कहानी के रूप में सराहा जाएगा।”
उन्होंने मेलोनी की राजनीतिक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक भारतीय पाठकों को निश्चित रूप से प्रेरित करेगी। मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि मेलोनी का अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व देना, भारतीय मूल्यों से मेल खाता है।
2021 में प्रकाशित हुआ था मूल संस्करण
मेलोनी की यह आत्मकथा पहली बार 2021 में प्रकाशित हुई थी, जब वह इटली में विपक्ष की नेता थीं। इसके एक साल बाद ही वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इस पुस्तक में मेलोनी ने नारी नेतृत्व, मातृत्व, देशभक्ति और सामाजिक संघर्षों पर अपने विचार साझा किए हैं।
ट्रंप जूनियर भी कर चुके हैं प्रस्तावना लेखन
इससे पहले जून 2025 में इस पुस्तक का अमेरिकी संस्करण लॉन्च किया गया था, जिसकी प्रस्तावना डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने लिखी थी। उन्होंने मेलोनी की मजदूर वर्ग की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए उन्हें “देशभक्ति की अनछुई आवाज़” बताया था।
“महिलाओं के लिए ही नहीं होती महिला की राजनीति”
पुस्तक में मेलोनी लिखती हैं, “मैंने कभी नहीं माना कि एक महिला को सिर्फ़ महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए राजनीति में आना चाहिए। राजनीति सबके लिए है – सबके भले के लिए।”
उन्होंने मातृत्व के मुद्दे पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी है और इसे महिला के आत्मबल का प्रतीक बताया है।
निष्कर्ष:
जॉर्जिया मेलोनी की यह आत्मकथा न केवल उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक सफर की कहानी है, बल्कि यह समकालीन नेतृत्व, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पहचान के विषयों पर भी एक गहरी दृष्टि प्रस्तुत करती है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिखी गई प्रस्तावना इस पुस्तक को भारतीय संदर्भ में और भी अधिक प्रासंगिक बना देती है।