
Report By: Kiran Prakash Singh
नवरात्रि पर ईशा का सशक्त संदेश: “देवी सिर्फ पूजने के लिए नहीं, जीने के लिए होती हैं”
मुंबई (Digital Live News)।
नवरात्रि जैसे शक्ति और श्रद्धा के पर्व पर अभिनेत्री और समाजसेवी ईशा ने महिलाओं को सशक्त बनाने और एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि “महिलाएं एक-दूसरे की प्रतियोगी नहीं, बल्कि साथी बनें।”
ईशा ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“सहयोग करो, साज़िश नहीं। हमें इस तरह ढाला गया है कि हम एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें, जबकि हमें एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए।”
“दूसरों की मंज़ूरी का इंतज़ार मत करो”
आज की दिखावे और बाहरी मान्यता पर आधारित दुनिया में ईशा ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे खुद को किसी और की स्वीकृति की मोहताज न समझें:
“पूरे गर्व से खुद का जश्न मनाओ। विरासत में मिली मानसिकता को चुनौती देना ही असली बदलाव है।”
उन्होंने कहा कि यह ज़रूरी नहीं कि चीज़ें जैसे अब तक होती आई हैं, वैसे ही आगे भी चलें।
“अगर आप नहीं उठेंगी, तो कौन उठेगा?”
ईशा का संदेश केवल प्रेरणात्मक नहीं, बल्कि क्रांतिकारी था। उन्होंने महिलाओं से कहा कि:
“दबाव को अपने आत्मविश्वास या विश्वासों को डगमगाने मत दो। अगर आप अपनी या किसी और महिला की सुरक्षा के लिए आवाज़ नहीं उठाओगी, तो कौन उठाएगा?”
उन्होंने महिलाओं को खामोशी की विरासत को तोड़ने की सलाह दी और साहसिक कदम उठाने का आह्वान किया।
“आज़ादी कोई उपहार नहीं, इसे अर्जित किया गया है”
ईशा ने अपनी बात को और तीव्र बनाते हुए कहा:
“महिलाओं को आज़ादी उपहार में नहीं मिली है। इसके लिए हमें लड़ना पड़ा है, और आज भी लड़ना पड़ रहा है।”
उनका मानना है कि जागरूकता ही असली शक्ति है, और यही वह हथियार है जिससे महिलाओं की आवाज़ को दबाना मुश्किल होगा।
“देवी सिर्फ पूजने के लिए नहीं होतीं, जीने के लिए होती हैं”
ईशा का नवरात्रि पर यह संदेश हर उस महिला के लिए है जो अपनी पहचान, आत्मसम्मान और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने अंत में बेहद प्रभावशाली शब्दों में कहा:
“देवी सिर्फ पूजने के लिए नहीं होती हैं। उन्हें जीने के लिए होती हैं।”