ईरान-इजराइल जंग का असर: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीज़ल संकट गहरा, पंप सूखने लगे ⛽🔥

Report By: Kiran Prakash Singh

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान को तेल आपूर्ति में भारी रुकावट का सामना करना पड़ रहा है, कई प्रांतों में पेट्रोल और डीज़ल पंप खाली दिख रहे हैं और संकट बढ़ रहा है।

Digitallivenews:-

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव का असर अब सीधे Pakistan के पेट्रोल और डीज़ल बाजार पर देखने को मिल रहा है। देश की ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय से Iran पर निर्भरता के कारण संकट गहराता जा रहा है, और कई प्रांतों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी की खबरें सामने आ रही हैं।

सबसे गंभीर स्थिति Balochistan में है, जहां लगभग 70% पेट्रोल पंप सूख चुके हैं और डीज़ल आपूर्ति भी भारी रूप से प्रभावित है। अन्य प्रांतों जैसे Sindh, Punjab, और Khyber Pakhtunkhwa में भी कमी के शुरुआती असर दिख रहे हैं।

इस संकट का मूल कारण ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ हैं। पाकिस्तान लंबी अवधि से ईरान से आधिकारिक और अवैध दोनों मार्गों से पेट्रोल और डीज़ल प्राप्त करता आया है: कुल तेल मांग का लगभग 35% इसी रास्ते से पूरा होता है, और कुछ क्षेत्रों जैसे बलोचिस्तान में यह आंकड़ा 80% तक पहुंच जाता है।

हालांकि पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि देश के पास पेट्रोल और डीज़ल के लगभग 24‑28 दिनों के भंडार मौजूद हैं, लेकिन युद्ध और Strait of Hormuz जैसे मुख्य तेल मार्गों पर तनाव के कारण आपूर्ति रुकने की आशंका बनी है।

बेंचमार्क बताते हैं कि मध्य पूर्व से वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान होने से दुनिया भर के तेल व्यापार पर असर पड़ रहा है। पाकिस्तान के तेल विपणन कंपनियों ने क़रीब आधी सप्लाई कम कर दी है और डीज़ल की आपूर्ति अब लगभग 20% तक गिर गई है। ऐसे हालात में पेट्रोल पंप बंद होने की चेतावनी भी दी जा रही है।

पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) के नेताओं ने कहा है कि यदि सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो कई पंप अगले कुछ दिनों में बंद होने तक की स्थिति आ सकती है, और देश में होर्डिंग और कालाबाज़ारी भी बढ़ सकती है।

सरकार भी खतरे को समझते हुए कई कदम उठा रही है, जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग, सप्लाई स्टॉक डैशबोर्ड बनाना और होर्डरों के खिलाफ कड़क कार्रवाई करना। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेट्रोल पंपों और डीलरों पर निगरानी तेज़ की जाए और जो भी आपूर्ति रोक रहा है, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँ।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध जारी रहा और मार्गों पर व्यवधान बना रहा, तो पाकिस्तान को अन्य स्रोतों से तेल आयात के विकल्प ढूँढने पड़ सकते हैं। हालांकि वर्तमान भंडार कुछ सप्ताह तक देश को चलते रहने के लिए पर्याप्त बताए जा रहे हैं, लेकिन जनता और उद्योगों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है।

लोगों की प्रतिक्रिया और भी चिंता बढ़ाती है क्योंकि पेट्रोल पंपों पर अफवाहों और संभावित कमी के डर से कतारें लगने लगी हैं। गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने अफवाहों से सावधान रहने की अपील भी की है।

कुल मिलाकर, ईरान‑इजराइल युद्ध का प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पड़ोसी देशों के रोज़मर्रा के संसाधनों, खासकर पेट्रोल और डीज़ल की आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ रहा है। इस बीच पाकिस्तान कोरो की आपूर्ति को संभालने के लिए योजना और नीति‑निर्धारण पर काम कर रहा है।

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