“गोरखपुर की दुर्गा पूजा: परंपरा और भव्यता का संगम”

Report By: Kiran Prakash Singh

गोरखपुर की दुर्गा पूजा: 125 वर्षों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव की जीवंत तस्वीर

गोरखपुर (digitallivenews)।
गोरखपुर में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि 125 वर्षों से जीवित एक सांस्कृतिक धरोहर है, जो आज आस्था, कला और परंपरा का संगम बन चुकी है। इसकी शुरुआत वर्ष 1896 में डॉ. योगेश्वर राय द्वारा की गई थी। धीरे-धीरे यह छोटी सी पहल एक विराट आयोजन में परिवर्तित हो गई, जो आज गोरखपुर की पहचान बन गई है।


📜 इतिहास की गहराइयों से भव्यता तक का सफर

  • 1928: बंगाली समिति का गठन हुआ, जिसने पूजा को संगठित रूप दिया

  • 1953: दीवान बाजार दुर्गाबाड़ी की स्थापना हुई, जो आज भी पूजा का प्रमुख केंद्र है

  • 1970 के दशक: रेलवे स्टेशन रोड पर विशाल प्रतिमाओं के साथ उत्सव ने मेले का रूप लिया


🌸 राघव-शक्ति मिलन: एकमात्र अनोखी परंपरा

1948 से चली आ रही यह अनूठी परंपरा देश में कहीं और देखने को नहीं मिलती
दशहरे के दिन, रामलीला की शोभायात्रा बसंतपुर तिराहे पर मां दुर्गा की प्रतिमा से मिलती है —
यह राम और शक्ति (दुर्गा) के मिलन का प्रतीक है, जो एकता और आध्यात्मिक संतुलन का संदेश देता है।


🛕 परंपरा और आधुनिकता का संगम

गोरखपुर की दुर्गा पूजा ने समय के साथ खुद को बदला भी है और संजोया भी है:

  • 1987 से यहां स्वचालित प्रतिमाएं बनाई जाने लगीं, जो आज भी आकर्षण का केंद्र हैं

  • कोलकाता से मूर्तिकारों को बुलाकर परंपरा की शुद्धता को बरकरार रखा जाता है

  • अब स्थानीय कलाकार भी इस कला में निपुण हो रहे हैं, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल रहा है


🎭 गोरखपुर: एक जीवंत सांस्कृतिक मंच

गोरखपुर की दुर्गा पूजा आज केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि:

  • कला, संगीत, नाटक और संस्कृति का उत्सव बन चुकी है

  • यहां के पंडाल, झांकियां और प्रदर्शनियां पूरे पूर्वांचल में प्रसिद्ध हैं

  • हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक जुटते हैं, जिससे यह उत्सव सामुदायिक एकता का भी उदाहरण बनता है


निष्कर्ष:

गोरखपुर की दुर्गा पूजा एक ऐसा पर्व है, जो हर साल न केवल मां दुर्गा के आगमन का स्वागत करता है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक चेतना को भी जीवित रखता है।
यह परंपरा, आधुनिकता, आस्था और सामाजिक एकता का जीता-जागता प्रमाण है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी संस्कार और संस्कृति की सीख देता रहेगा।

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