
Report By: Kiran Prakash Singh
स्टारलिंक विवाद के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2.4% से ज्यादा गिरे। कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब ₹39,718 करोड़ घटा, जबकि सरकार ने मस्क के आरोप खारिज किए।
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मस्क के बयान के बाद रिलायंस के शेयर टूटे, बाजार मूल्यांकन में ₹39,718 करोड़ की कमी
डिजिटल लाइव न्यूज | 9 अक्टूबर 2026 | digitallivenews.com
अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क और भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की लॉन्चिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार, 8 अक्टूबर को कंपनी के शेयर 2 प्रतिशत से अधिक टूटे और बाजार मूल्यांकन में करीब 39,718 करोड़ रुपये की कमी आई। यह गिरावट ऐसे समय में हुई, जब मस्क ने भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू करने में कथित बाधाओं को लेकर सवाल उठाए और बाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का नाम लेकर टिप्पणी की। हालांकि, शेयरों में गिरावट का पूरा कारण केवल मस्क के बयान को मानना उचित नहीं होगा।
1. रिलायंस के शेयरों में कितनी आई गिरावट?
गुरुवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के अनुसार, BSE पर शेयर 2.43 प्रतिशत गिरकर 1,177.30 रुपये पर बंद हुआ, जबकि NSE पर इसमें 2.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,178 रुपये पर बंद हुआ।
इस गिरावट के बाद कंपनी का बाजार मूल्यांकन घटकर लगभग 15,93,185.78 करोड़ रुपये रह गया। एक कारोबारी दिन में करीब 39,718 करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घटने से यह मामला चर्चा में आ गया।
बाजार पूंजीकरण में बदलाव शेयर की कीमत के उतार-चढ़ाव से होता है। इसलिए इसे कंपनी के खाते से सीधे 39,718 करोड़ रुपये निकल जाने के रूप में नहीं समझना चाहिए। यह कंपनी के शेयरों के कुल बाजार मूल्य में आई कमी है।
2. एलन मस्क ने स्टारलिंक को लेकर क्या आरोप लगाए?
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों की प्रतीक्षा कर रही है। इसी मुद्दे पर मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक की भारत में एंट्री में बाधा डाल रहे हैं।
मस्क का दावा है कि ऐसा प्रतिस्पर्धा को सीमित रखने और मौजूदा कारोबारियों की बाजार में पकड़ बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टारलिंक 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त कर चुकी है और भारत में नियमों का पालन करने के बावजूद सेवा शुरू नहीं कर पा रही है।
ये मस्क के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया निष्पक्ष है और सभी कंपनियों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
3. मुकेश अंबानी को लेकर मस्क की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा
सरकार की प्रतिक्रिया के बाद मस्क ने X पर एक और पोस्ट किया। इसमें उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं? इस टिप्पणी के बाद स्टारलिंक और भारतीय दूरसंचार बाजार से जुड़ा विवाद और सुर्खियों में आ गया।
भारत में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां हैं। दोनों समूहों की सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में भी कारोबारी योजनाएं हैं। ऐसे में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर मंजूरी और प्रतिस्पर्धा के सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।
हालांकि, मस्क की टिप्पणी अपने आप में यह साबित नहीं करती कि रिलायंस ने स्टारलिंक की सेवाएं रोकने के लिए कोई कदम उठाया है। इस मामले में कारोबारी आरोपों और सरकार की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।
4. भारत सरकार ने क्या जवाब दिया?
मस्क के आरोपों के जवाब में दूरसंचार विभाग ने कहा कि भारत का सैटेलाइट संचार सेवाओं से संबंधित नियामकीय ढांचा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है। सरकार के मुताबिक, स्टारलिंक सहित संबंधित कंपनियां सुरक्षा जांच और अन्य जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट सेवा और भारती एयरटेल से जुड़ी वनवेब को शुरुआती स्तर की मंजूरियां मिली हैं, लेकिन व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी सुरक्षा आकलन और स्पेक्ट्रम संबंधी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं में स्पेक्ट्रम का आवंटन और सुरक्षा मंजूरी अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार का कहना है कि इन शर्तों का पालन सभी संबंधित कंपनियों को करना होगा। इसलिए विवाद का मुख्य मुद्दा केवल कारोबारी प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की नियामकीय प्रक्रिया भी है।
5. शेयर बाजार पर भी दिखा दबाव
गुरुवार को रिलायंस के साथ टेलीकॉम क्षेत्र के दूसरे शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया के शेयर 3 प्रतिशत से अधिक और भारती एयरटेल के शेयर करीब 2 प्रतिशत नीचे आए।
इसी दिन व्यापक भारतीय शेयर बाजार में भी दबाव देखा गया। हालांकि, शेयर बाजार में किसी एक कंपनी के प्रदर्शन पर कई कारकों का असर पड़ता है, जिनमें कारोबारी माहौल, निवेशकों की धारणा, बाजार की व्यापक चाल और कंपनी से जुड़ी खबरें शामिल हैं।
स्टारलिंक विवाद ने रिलायंस के शेयरों को लेकर चर्चा जरूर बढ़ाई, लेकिन बाजार की हर गिरावट को किसी एक बयान का सीधा परिणाम मानना सही नहीं होगा। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर रिलायंस के शेयरों की चाल और भारत में स्टारलिंक की मंजूरी से जुड़े घटनाक्रम पर रहेगी।
फिलहाल, मस्क और भारत सरकार के बीच बयानबाजी ने सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा तथा नियामकीय मंजूरियों को लेकर बहस तेज कर दी है। इस विवाद का आगे क्या असर होगा, यह संबंधित कंपनियों की प्रगति, सरकारी फैसलों और बाजार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
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