
Report By: Kiran Prakash Singh
CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि केवल न्यूज रिपोर्ट के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।
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CEC निलंबन की मांग पर SC का इनकार, ECI से मांगा जवाब
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह केवल न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी नहीं कर सकता। हालांकि, मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कथित फैसलों को लेकर दायर याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब में कहा है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती हैं और उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।
1. CEC को निलंबित करने की मांग पर क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने CEC ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर निलंबित करने की मांग रखी। याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों और उसकी बहुसदस्यीय प्रकृति को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोग में फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि मामले की सुनवाई लंबित रहने के दौरान CEC को कुछ कार्यों से अलग रखा जाए और आयोग का काम बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति से संचालित हो।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर निलंबन का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया और पहले संबंधित पक्षों का जवाब सुनने का फैसला किया।
2. ‘न्यूज रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि किसी मीडिया रिपोर्ट को सीधे आधार बनाकर अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक न्यूज रिपोर्ट पूरी तरह सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद यह सामने आता है कि कोई निर्णय कानून के मुताबिक नहीं लिया गया था, तो अदालत उसके खिलाफ उचित कार्रवाई पर विचार कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी पाए जाने वाले फैसलों को बाद में रद्द किया जा सकता है।
इसका मतलब यह है कि अदालत ने मामले को बंद नहीं किया है, बल्कि फिलहाल तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है।
3. याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। यह मामला खास तौर पर SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से संबंधित है।
मामले की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि, यह रिपोर्ट में किए गए दावे हैं और मामले में इन आरोपों की न्यायिक जांच अभी जारी है।
याचिकाकर्ताओं ने इन्हीं आरोपों के आधार पर आयोग की निर्णय प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग की है।
4. सुप्रीम कोर्ट ने ECI और केंद्र को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अब इन पक्षों से याचिका में लगाए गए आरोपों पर जवाब मांगा गया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि जवाब और रिकॉर्ड की जांच के बाद यह पाया जाता है कि कोई निर्णय आवश्यक सामूहिक सहमति के बिना लिया गया था, तो अदालत उस फैसले को दोबारा देखने या रद्द करने पर विचार कर सकती है।
5. अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार का निलंबन नहीं हुआ है। अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
अब आगे की कार्यवाही में अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड पर विचार करेगी। यदि रिकॉर्ड से किसी फैसले में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन सामने आता है, तो अदालत उस पर उचित आदेश दे सकती है।
SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर पहले से चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मीडिया रिपोर्ट अपने आप में अंतरिम आदेश का आधार नहीं बन सकती और किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों का जवाब तथा रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
दिनांक: 5 अक्टूबर 2026
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