
Report By: Kiran Prakash Singh
अगस्त 2026 में LPG की खपत 16.15% घटकर 2.42 मिलियन टन रही। वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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LPG खपत में 16% की गिरावट, पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी
देश में रसोई गैस यानी LPG की खपत को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। अगस्त 2026 में भारत में एलपीजी की खपत पिछले साल के मुकाबले 16.15 फीसदी घट गई। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में देश में एलपीजी की खपत 2.42 मिलियन टन रही, जबकि अगस्त 2025 में यह 2.89 मिलियन टन थी।
आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में एलपीजी की खपत में करीब 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की खपत में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे देश के ईंधन बाजार में मांग के पैटर्न को लेकर नई तस्वीर सामने आई है।
अगस्त में LPG खपत में बड़ी गिरावट
अगस्त 2026 के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक एलपीजी की खपत 2.42 मिलियन टन रही। पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 2.89 मिलियन टन था। यानी एक साल में एलपीजी की खपत में करीब 0.47 मिलियन टन की कमी आई।
एलपीजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से घरेलू खाना पकाने के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया जाता है। ऐसे में इसकी खपत में लगातार गिरावट बाजार और उपभोक्ता व्यवहार दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पांच महीनों में भी खपत घटी
एलपीजी की खपत में कमी केवल अगस्त तक सीमित नहीं रही। अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत में एलपीजी की कुल खपत 15.89 फीसदी घटकर 11.29 मिलियन टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में एलपीजी की खपत 13.42 मिलियन टन थी।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि एलपीजी की खपत में कमी पिछले कुछ महीनों से बनी हुई है। हालांकि शुरुआती आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है, लेकिन मौजूदा आंकड़े एलपीजी मांग में कमजोरी की ओर इशारा करते हैं।
सप्लाई और आयात का भी दबाव
एलपीजी की खपत में गिरावट के पीछे केवल कीमतों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। सप्लाई में दबाव, आयात संबंधी चुनौतियां और उपलब्धता भी महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। वेस्ट एशिया में बने संकट और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी सप्लाई संबंधी दिक्कतों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है। इसका असर एलपीजी की उपलब्धता और सप्लाई व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में कंपनियों और सरकार की प्राथमिकता उपलब्ध एलपीजी का प्रभावी वितरण बनाए रखना होती है। वहीं उपभोक्ताओं के स्तर पर भी मांग में बदलाव देखने को मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ी
जहां एलपीजी की खपत में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी है। अगस्त 2026 में देश में पेट्रोल की खपत 7.88 फीसदी बढ़कर 3.82 मिलियन टन हो गई। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3.54 मिलियन टन था।
इसी तरह डीजल की खपत भी बढ़ी है। अगस्त में डीजल की खपत 6.46 फीसदी बढ़कर करीब 7 मिलियन टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल अगस्त में यह 6.58 मिलियन टन थी।
पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ने के पीछे परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कई कारक हो सकते हैं।
PNG को बढ़ावा देने की कोशिश
एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार की ओर से शहरों में PNG कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। पाइप्ड नेचुरल गैस के विस्तार से कुछ शहरी उपभोक्ताओं के लिए खाना पकाने के ईंधन का विकल्प बदल सकता है।
हालांकि देश के बड़े हिस्से में घरेलू खाना पकाने के लिए एलपीजी अभी भी महत्वपूर्ण ईंधन है। इसलिए इसकी खपत में इतनी बड़ी गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा।
फिलहाल अप्रैल से अगस्त के आंकड़ों में लगातार गिरावट और अगस्त में 16.15 फीसदी की कमी एलपीजी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले महीनों में सप्लाई की स्थिति, कीमतों, आयात और उपभोक्ता मांग पर नजर रहेगी। वहीं पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत ईंधन बाजार में मांग के अलग-अलग रुझानों को सामने ला रही है।
दिनांक: 2 सितंबर 2026
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