PM मोदी की अपील से ज्वेलर्स परेशान, सोने की बिक्री पर संकट

Report By: Kiran Prakash Singh

PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील से ज्वेलर्स और कारीगर चिंतित हैं। कारोबारियों को शादी सीजन में बिक्री घटने और रोजगार पर असर पड़ने का डर है।

नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

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PM मोदी की अपील से ज्वेलर्स परेशान, सोने की बिक्री पर संकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद देशभर के ज्वेलरी कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली समेत कई जगहों पर ज्वेलर्स, सुनार, कारीगर और छोटे रिटेल कारोबारी आने वाले समय में बिक्री प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं। कारोबारियों को खास तौर पर आगामी त्योहारी और शादी सीजन को लेकर चिंता है।

दूसरी अपील के बाद कारोबारियों की बढ़ी चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले 10 मई 2026 को हैदराबाद की एक रैली में लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। अब दूसरी बार गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील किए जाने के बाद ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, दूसरी अपील के बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े कई व्यापारियों ने संगठन के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। कारोबारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्तर पर ऐसी अपील से ग्राहकों में सोने की कीमतों और भविष्य की खरीदारी को लेकर हिचकिचाहट बढ़ सकती है।

800 टन से 500 टन तक घट सकती है खपत

CTI का अनुमान है कि भारत में सोने की सालाना खपत 700 से 800 टन के आसपास रहती है। संगठन का दावा है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह खपत घटकर करीब 500 टन तक पहुंच सकती है।

कारोबारियों के मुताबिक, ग्राहक यदि यह मानने लगें कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में गिरावट हो सकती है, तो वे खरीदारी को टाल सकते हैं। इसका सीधा असर ज्वेलरी दुकानों की बिक्री और नए ऑर्डर पर पड़ सकता है।

हालांकि, सोने की कीमतों का भविष्य कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए कीमतों में निश्चित गिरावट की धारणा को लेकर कारोबारियों की आशंका को अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

शादी सीजन से पहले बिक्री को लेकर डर

ज्वेलरी कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता आगामी अक्टूबर-नवंबर के शादी सीजन को लेकर है। भारतीय परिवारों में शादी के दौरान सोने के आभूषणों की खरीदारी का महत्वपूर्ण स्थान है। कई परिवार शादी की तैयारियों के तहत पहले से ही गहनों की खरीद शुरू कर देते हैं।

कारोबारियों का कहना है कि यदि ग्राहक खरीदारी को टालते हैं तो इसका असर त्योहारी बिक्री के साथ शादी सीजन के कारोबार पर भी पड़ सकता है। छोटे दुकानदारों के लिए यह चिंता ज्यादा गंभीर है, क्योंकि उनके कारोबार का बड़ा हिस्सा स्थानीय ग्राहकों और पारंपरिक मांग पर निर्भर करता है।

छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर असर की आशंका

ज्वेलर्स के मुताबिक बिक्री में लंबे समय तक कमजोरी रहने पर इसका असर सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। सुनार और ज्वेलरी कारीगर भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। कारोबारियों का दावा है कि पहली अपील के बाद कुछ छोटे मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स के कारोबार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।

कुछ कारोबारियों ने दावा किया है कि कई दुकानों पर पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम रही है। कमजोर मांग के कारण कुछ रिटेल विक्रेताओं ने नया स्टॉक लेने और नए ऑर्डर देने में भी सावधानी बरतनी शुरू कर दी है।

कारीगरों को चिंता है कि यदि ऑर्डर कम हुए तो काम के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं। खासकर छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगरों के लिए लगातार कम ऑर्डर रोजगार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारियों के बीच अंतर

कारोबारियों का कहना है कि बिक्री में गिरावट का असर छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारीगरों पर ज्यादा पड़ सकता है। उनका तर्क है कि बड़े कॉरपोरेट ज्वेलरी ब्रांड्स के पास अपेक्षाकृत अधिक संसाधन और विविध कारोबारी मॉडल हैं।

CTI से जुड़े कारोबारियों ने Titan, Senco Gold और Kalyan Jewellers जैसी सूचीबद्ध कंपनियों के कारोबार और शेयरों पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि किसी कंपनी के शेयर पर वास्तविक असर बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

कारोबारियों का एक वर्ग यह भी तर्क दे रहा है कि सोना भारतीय संस्कृति, परंपराओं और शादियों से गहराई से जुड़ा है। उनके मुताबिक, सोने की खरीदारी को केवल गैर-जरूरी खर्च के तौर पर देखना छोटे कारोबारियों और कारीगरों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज कर सकता है।

फिलहाल ज्वेलरी उद्योग की नजर आगामी त्योहारी और शादी सीजन पर है। कारोबारियों को उम्मीद है कि मांग में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आएगी, जबकि दूसरी ओर वे सरकार की अपील से पैदा हुई ग्राहक हिचकिचाहट को लेकर सतर्क हैं। आने वाले महीनों में बिक्री के वास्तविक आंकड़े ही बताएंगे कि प्रधानमंत्री की अपील का ज्वेलरी बाजार पर कितना असर पड़ा।

दिनांक: 2 सितंबर 2026
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