
Report By: Kiran Prakash Singh
“पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने आतंकियों से मुलाकात पर शुक्रिया कहा था”: यासीन मलिक का हलफनामे में सनसनीखेज दावा
नई दिल्ली, (digitallivenews)।
टेरर फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में मलिक ने कहा है कि वर्ष 2006 में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से उसकी मुलाकात भारत सरकार की बैकचैनल डिप्लोमेसी का हिस्सा थी — और इस मुलाकात के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उसे “व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद” दिया था।
हलफनामे में बड़ा दावा: सरकार की अनुमति से हुई आतंकी नेताओं से मुलाकात
25 अप्रैल को दाखिल इस हलफनामे के मुताबिक, यासीन मलिक ने बताया कि 2005 के कश्मीर भूकंप के बाद वह पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के तत्कालीन विशेष निदेशक वीके जोशी ने दिल्ली में उससे मुलाकात की।
मलिक के अनुसार, जोशी ने अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान में राजनीतिक और आतंकवादी गुटों से संपर्क साधे, ताकि भारत-पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता को समर्थन मिल सके।
मलिक का कहना है, “मुझे साफतौर पर बताया गया कि जब तक आतंकियों को बातचीत में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक पाकिस्तान से किसी भी वार्ता का ठोस नतीजा नहीं निकलेगा।”
हाफिज सईद से बैठक और दिल्ली वापसी
मलिक ने हलफनामे में दावा किया है कि हाफिज सईद ने उसकी पहल पर जिहादी संगठनों की बैठक बुलाई थी, जो शांति प्रयासों को लेकर थी।
पाकिस्तान से लौटने के बाद, वह फिर से वीके जोशी से दिल्ली के एक होटल में मिला, जहां उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री को सीधे ब्रीफ करने के लिए कहा गया।
मनमोहन सिंह से सीधी मुलाकात का दावा
यासीन मलिक के अनुसार, उसी शाम उसकी मुलाकात तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से हुई।
मलिक ने कहा:
“मैंने उन्हें अपनी मुलाकातों और जमीनी हालात के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. सिंह ने मेरे प्रयासों, समय और धैर्य के लिए व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया।”
अन्य बड़े नेताओं का भी नाम
हलफनामे में यासीन मलिक ने सिर्फ मनमोहन सिंह ही नहीं, बल्कि भारत के कई अन्य बड़े नेताओं के साथ हुई मुलाकातों का भी जिक्र किया है। इनमें शामिल हैं:
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अटल बिहारी वाजपेयी
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सोनिया गांधी
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पी. चिदंबरम
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आई.के. गुजराल
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राजेश पायलट
मलिक ने इन मुलाकातों को अपने “राजनीतिक प्रयासों का हिस्सा” बताया है।
पृष्ठभूमि: टेरर फंडिंग में दोषी, उम्रकैद की सजा
गौरतलब है कि यासीन मलिक को 2022 में टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद से जुड़े कई मामलों में भी आरोपी है।
निष्कर्ष: अदालत में रणनीतिक चाल या राजनीतिक धमाका?
यासीन मलिक के इन दावों से नई बहस शुरू हो गई है। जहां कुछ इसे अदालत में अपनी सजा को चुनौती देने की रणनीति मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे भारतीय राजनीतिक इतिहास में गंभीर आरोप के रूप में देख रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत और सरकार इस हलफनामे पर क्या रुख अपनाते हैं।