
Report By: Kiran Prakash Singh
अनुराग ठाकुर का राहुल गांधी पर पलटवार: कहा, “कांग्रेस 90 चुनाव हार चुकी है, इसलिए निराधार आरोप लगा रहे हैं”
नई दिल्ली, (DIGITALLIVENEWS)।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कड़ा जवाब आया है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके नेता हताशा की राजनीति कर रहे हैं, क्योंकि वे लगातार 90 से अधिक चुनाव हार चुके हैं।
“कभी माफी मांगनी पड़ती है, कभी कोर्ट की फटकार सुननी पड़ती है। राहुल गांधी ने झूठे आरोपों को अपनी राजनीतिक दिनचर्या बना लिया है,” — अनुराग ठाकुर
क्या कहा अनुराग ठाकुर ने?
अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी झूठे, भ्रामक और बेबुनियाद आरोपों की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने राहुल पर तंज कसते हुए कहा:
“राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 90 चुनाव हार चुकी है। यही उनकी हताशा और बौखलाहट का कारण है। अब वे जनता के बीच आरोपों की राजनीति को नया आभूषण बनाकर पेश कर रहे हैं।”
उन्होंने राहुल गांधी पर यह आरोप भी लगाया कि वह भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा करना चाहते हैं।
क्या था राहुल गांधी का आरोप?
गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग पर सीधे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि:
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कांग्रेस समर्थकों के नाम सुनियोजित ढंग से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार “वोट चोरों” की रक्षा कर रहे हैं।
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उन्होंने निर्वाचन आयोग से एक सप्ताह में कर्नाटक की सीआईडी को जानकारी साझा करने की मांग भी की।
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राहुल गांधी ने कलबुर्गी (कर्नाटक) के आलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां मतदाताओं के नाम बिना जानकारी के हटाए गए।
राहुल ने कहा कि यह “हाइड्रोजन बम नहीं है, बल्कि हाइड्रोजन बम तो अभी आना बाकी है।”
निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया अब तक नहीं
राहुल गांधी के इन गंभीर आरोपों पर अब तक भारत निर्वाचन आयोग की कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक गलियारों में इस बयानबाजी को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज़ हो गया है।
🔹 राजनीतिक विश्लेषण: बढ़ता सियासी तनाव
बीजेपी जहां राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक स्टंट बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला मान रही है। चुनावी वर्ष में इस तरह के बयानों से:
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मतदाता विश्वास प्रभावित हो सकता है
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निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं
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और सत्ताधारी दल पर दबाव भी बनता है