
Report By: Kiran Prakash Singh
टोक्यो | DigitalLiveNews
भारत और जापान ने 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति को लेकर एकजुट रुख अपनाया है। जापान ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का संदेश दिया। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जिसे लेकर जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने गंभीर चिंता जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष ने एक संयुक्त बयान में कहा कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा, आईएसआईएस और उनके प्रॉक्सी संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र सूची के आधार पर निर्णायक और सामूहिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आतंकी संगठनों की फंडिंग बंद करने, पनाहगाह खत्म करने और सीमा-पार आतंकवाद को रोकने की अपील की।
इसके साथ ही, दोनों नेताओं ने म्यांमार की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने सभी पक्षों से हिंसा रोकने, आपातकाल समाप्त करने और निष्पक्ष चुनाव की मांग की, साथ ही आसियान के फाइव पॉइंट कंसेंसस को पूर्ण रूप से लागू करने का समर्थन किया।
भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के साथ-साथ अफ्रीका में सतत आर्थिक विकास पर भी साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया। दोनों देशों ने “जापान-इंडिया कोऑपरेशन इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल इकोनॉमिक डेवलपमेंट इन अफ्रीका” का स्वागत किया, जो भारत को अफ्रीका में औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों का दृष्टिकोण समान नजर आया। उन्होंने यूक्रेन में स्थायी शांति, उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल परीक्षणों की निंदा और कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण निरस्त्रीकरण की वकालत की। साथ ही, उत्तर कोरिया से संवाद में लौटने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने इशिबा को क्वाड नेताओं के आगामी शिखर सम्मेलन में भारत आने का निमंत्रण दिया, जिससे यह स्पष्ट है कि भारत-जापान साझेदारी आतंकवाद विरोधी लड़ाई से लेकर वैश्विक रणनीतिक संतुलन तक मजबूत होती जा रही है।