
Report By: Kiran Prakash Singh
महाराष्ट्र में जनवरी 2022 से जून 2026 तक किसानों की आत्महत्या के 13,928 मामले दर्ज हुए। RTI के तहत सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 4,042 मामलों में सहायता के दावे खारिज हुए, जबकि जिलावार जानकारी नहीं मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता ने सवाल उठाए।
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महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के 13,928 मामले, जिलावार आंकड़े नहीं मिलने पर सवाल
Digital Live News | 26 अक्टूबर 2026 | digitallivenews.com
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या से जुड़े आंकड़ों ने कृषि संकट और सरकारी सहायता व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच राज्य में किसानों की आत्महत्या के 13,928 मामले दर्ज किए गए। इन आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में औसतन हर दिन आठ से अधिक मामले सामने आए।
हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने पहली बार जिलावार आंकड़े उपलब्ध कराने से इनकार किया। उनका कहना है कि अपील के बाद उन्हें पूरे राज्य के आंकड़े तो दिए गए, लेकिन जिले और महीने के हिसाब से जानकारी नहीं मिली।
1. 13,928 मामलों में से 8,945 सहायता के पात्र
राज्य सरकार के राहत एवं पुनर्वास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच दर्ज कुल 13,928 मामलों में से 8,945 मामले आर्थिक सहायता के लिए पात्र पाए गए।
आंकड़ों के अनुसार:
- 13,928 मामले: किसानों की आत्महत्या के कुल दर्ज मामले
- 8,945 मामले: सरकारी सहायता के पात्र
- 4,042 मामले: सहायता के लिए अपात्र घोषित
- 941 मामले: जांच के अधीन
- 8,650 परिवार: एक-एक लाख रुपये की सहायता प्राप्त कर चुके
- 295 परिवार: पात्र होने के बावजूद सहायता का इंतजार कर रहे
इस तरह सहायता के लिए विचार किए गए कई मामलों में दावे खारिज हुए, जबकि पात्र घोषित किए जाने के बाद भी कुछ परिवारों को आर्थिक मदद नहीं मिल पाई है।
2. RTI के तहत जिलावार जानकारी मांगी थी
‘यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन’ से जुड़े जितेंद्र घाडगे ने जनवरी 2022 से जून 2026 तक किसानों की आत्महत्या के जिलावार और महीनेवार आंकड़े मांगे थे।
जानकारी के मुताबिक, 24 जुलाई को विभाग की जन सूचना अधिकारी स्नेहल सावंत ने जवाब दिया कि संबंधित विवरण जिलाधिकारी कार्यालयों के पास उपलब्ध हैं और आवेदक वहां से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके बाद घाडगे ने 18 अगस्त को प्रथम अपील दायर की। 8 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद उन्हें पूरे महाराष्ट्र का संयुक्त आंकड़ा उपलब्ध कराया गया, लेकिन जिलावार विवरण नहीं दिया गया।
घाडगे का दावा है कि पिछले एक दशक में यह पहली बार हुआ है, जब विभाग ने उन्हें जिलावार आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों के दबाव की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
3. जिलावार आंकड़ों से क्या मिलती है जानकारी?
किसानों की आत्महत्या के जिलावार आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि राज्य के किन क्षेत्रों में संकट अधिक गंभीर है। इससे यह आकलन भी किया जा सकता है कि कर्ज, फसल नुकसान, सिंचाई, बाजार की परिस्थितियों और अन्य समस्याओं से प्रभावित क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है या नहीं।
घाडगे का कहना है कि आंकड़ों की उपलब्धता केवल शोधकर्ताओं और पत्रकारों के लिए ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की समीक्षा और जरूरतमंद परिवारों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या के प्रत्येक मामले के पीछे एक परिवार होता है, जिसे आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, सहायता व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि संकटग्रस्त परिवारों को समय पर मदद मिल सके।
4. 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
किसानों की आत्महत्या और मुआवजे के मुद्दे पर घाडगे ने 21 जून 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी पत्र लिखा था।
उन्होंने उन परिवारों का मुद्दा उठाया था, जिनके एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता के दावे खारिज कर दिए गए थे। साथ ही उन्होंने गोपीनाथ मुंडे शेतकरी अपघात विमा योजना के तहत आत्महत्या के मामलों को शामिल करने का सुझाव दिया था, ताकि प्रभावित परिवारों को दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सके।
घाडगे ने तालुका स्तर पर समितियां गठित करने का प्रस्ताव भी दिया था। उनका सुझाव था कि सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी से संकटग्रस्त परिवारों की पहचान की जाए और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।
उनके अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय ने ई-मेल मिलने की पुष्टि करते हुए उसे कृषि विभाग को भेजा था, लेकिन उन्हें बाद में कोई जवाब नहीं मिला।
5. आर्थिक सहायता और पारदर्शिता पर उठे सवाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हजारों मामलों में परिवार आर्थिक सहायता के पात्र पाए गए, लेकिन सभी को अब तक भुगतान नहीं हुआ है। वहीं, 4,042 मामलों में सहायता के दावे खारिज किए गए और 941 मामलों की जांच जारी है।
ऐसे में दो प्रमुख सवाल सामने आते हैं—पहला, पात्र परिवारों को सहायता समय पर कैसे मिले और दूसरा, अपात्र घोषित किए गए मामलों में फैसले किन आधारों पर लिए गए।
जिलावार जानकारी नहीं मिलने से यह समझना भी मुश्किल हो जाता है कि राज्य के किन हिस्सों में किसानों की आत्महत्या के मामले अधिक दर्ज हुए और किन क्षेत्रों में सरकारी सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है।
फिलहाल RTI के जरिए सामने आए आंकड़े महाराष्ट्र में किसानों के संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे ने जिलावार आंकड़े सार्वजनिक करने और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। इस मामले में विभाग की ओर से जिलावार जानकारी नहीं देने के कारणों पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
दिनांक: 26 अक्टूबर 2026
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